'हिंदी हैं हम' शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है- धड़, जिसका अर्थ है - शरीर में गले के नीचे से कमर तक का सारा भाग, पेड़ का तना। प्रस्तुत है- माखनलाल चतुर्वेदी की कविता- ओ पूरब के प्रलयी पंथी, ओ जग के सेनानी

मुक्त गनन है, मुक्त पवन है, मुक्त साँस गरबीली,
लाँघ सात लँबी सदियों को हुई शृंखला ढीली।

टूटी नहीं कि लगा अभी तक उपनिवेश का दाग़
बोल तिरंगे तुझे उड़ाऊँ या कि जगाऊँ आग?

उठ रणराते, ओ बलखाते, विजयी भारतवर्ष
नक्षत्रों पर बैठे पूर्वज माप रहे उत्कर्ष।

ओ पूरब के प्रलयी पंथी, ओ जग के सेनानी
होने दे भूकंप कि तूने, आज भृकुटियाँ तानी।

नभ तेरा है?—तो उड़ते हैं वायुयान ये किसके?
भुज-वज्रों पर मुक्ति-स्वर्ण को देख लिया है कसके?

तीन ओर सागर तेरा है, लहरें दौड़ी आती
चरण, भुजा, कटिबंध देश तक वे अभिषेक सजातीं।

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24 minutes ago

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