'हिंदी हैं हम' शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है- निर्वाह, जिसका अर्थ है- परंपरा आदि को बरकरार रखना, किसी निश्चय या प्रथा के अनुसार होने वाला आचरण, जीवनयापन। प्रस्तुत है प्रेमशंकर शुक्ल की कविता-पानी-सी कोमलता, आकाश जितना अथाहपन  

मेरे कंठ ने अभी जिस
सुगंधित-कोमल लोकगीत का
स्पर्श पाया। वह एक मेहनतकश सुंदर स्त्री के
होंठ से फूटा है पहली बार।

इस गीत में जो घास-गंध है,
पानी-सी कोमलता, आकाश जितना अथाहपन
और हरी-भरी धरती की आकांक्षा

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14 minutes ago

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By admin

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